Brinjal Farming: देशभर में मई और जून की भीषण गर्मी अब किसानों की चिंता बढ़ाने लगी है. खासकर बैंगन की खेती करने वाले किसान तेज गर्म हवाओं और लगातार बढ़ते तापमान से भारी नुकसान झेल रहे हैं. कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने से बैंगन के पौधों पर बुरा असर देखने को मिल रहा है. खेतों में फल और फूल सूखकर गिरने लगे हैं, जिससे उत्पादन तेजी से घट रहा है. कृषि जानकारों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी के कारण पौधों में पानी की कमी बढ़ जाती है. तेज धूप और गर्म हवाओं की वजह से पौधों की पत्तियां तेजी से नमी छोड़ती हैं, जबकि जड़ें उतनी तेजी से पानी नहीं खींच पातीं. इसी कारण पौधों पर तनाव बढ़ जाता है और छोटे फल व कोमल फूल सूखकर गिरने लगते हैं. अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो किसानों की पैदावार आधी तक रह सकती है.
मल्चिंग और सही सिंचाई से मिलेगा राहत
विशेषज्ञों के अनुसार, बैंगन की फसल को गर्मी से बचाने के लिए खेत में नमी बनाए रखना सबसे जरूरी है. इसके लिए किसानों को पौधों के आसपास मल्चिंग करनी चाहिए. खेत में सूखी घास, फसल अवशेष या प्लास्टिक मल्च बिछाने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इससे जमीन का तापमान नियंत्रित रहता है और जड़ों को ठंडक मिलती है. मल्चिंग का एक बड़ा फायदा यह भी है कि फल सीधे गर्म मिट्टी के संपर्क में नहीं आते, जिससे उनके सूखने की संभावना कम हो जाती है. इसके अलावा खेत में बार-बार पानी देने की जरूरत भी कम पड़ती है, जिससे पानी की बचत होती है. गर्मी के मौसम में सिंचाई का समय भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. किसानों को दोपहर के समय भूलकर भी खेत में पानी नहीं देना चाहिए, क्योंकि तेज गर्मी में पानी जल्दी उड़ जाता है और पौधों को फायदा नहीं मिल पाता. सुबह जल्दी या शाम के समय सिंचाई करना ज्यादा लाभकारी रहता है.
लू और तेज धूप से बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय
बैंगन की फसल को गर्म हवाओं से बचाने के लिए खेत के चारों ओर ऊंची फसलें लगाना फायदेमंद माना जाता है. किसान खेत की मेड़ पर मक्का या बाजरा जैसी फसलें लगा सकते हैं, जो प्राकृतिक विंड ब्रेकर का काम करती हैं. इससे गर्म लू सीधे पौधों तक नहीं पहुंच पाती और फसल सुरक्षित रहती है. इसके अलावा ग्रीन शेड नेट का इस्तेमाल भी गर्मी से राहत देने में मददगार साबित हो सकता है. 50 प्रतिशत ग्रीन शेड नेट लगाने से तेज धूप का असर कम होता है और पौधों को पर्याप्त सुरक्षा मिलती है. इससे फल और फूल झड़ने की समस्या भी कम होती है.
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विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पौधों को अतिरिक्त पोषण की भी आवश्यकता होती है. ऐसे समय में नाइट्रोजन की मात्रा कम रखनी चाहिए, क्योंकि इससे कोमल पत्तियां ज्यादा निकलती हैं जो तेज गर्मी में जल्दी खराब हो जाती हैं. इसके बजाय पोटाश और बोरॉन जैसे पोषक तत्वों का छिड़काव अधिक फायदेमंद माना जाता है. बोरॉन के प्रयोग से पौधों के फूल और फल मजबूत होते हैं. इससे फल गिरने की समस्या कम होती है और बैंगन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है. फलों की चमक बढ़ने से बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है.
फल छेदक कीट से ऐसे बचाएं फसल
गर्मी के मौसम में बैंगन की फसल पर तना और फल छेदक कीट का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. ये कीट फल के अंदर घुसकर उसे नुकसान पहुंचाता है, जिससे फल अंदर से खराब होने लगते हैं. प्रभावित फल समय से पहले सूख जाते हैं और बाजार में बेचने योग्य नहीं रहते. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों को समय रहते कीट प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए. इसके लिए खेतों में फेरोमोन ट्रैप लगाना काफी असरदार माना जाता है. प्रति एकड़ 4 से 5 ट्रैप लगाने से कीटों की संख्या नियंत्रित की जा सकती है. शुरुआती अवस्था में नीम के तेल का छिड़काव भी फायदेमंद होता है. यदि कीट का प्रकोप अधिक बढ़ जाए, तो विशेषज्ञों की सलाह से उचित कीटनाशकों का प्रयोग करना चाहिए. साथ ही संक्रमित फलों और टहनियों को खेत से हटाकर मिट्टी में दबा देना चाहिए, ताकि संक्रमण आगे न फैले.