Fertilizer Management: देश में उर्वरकों की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच किसानों के सामने खेती की लागत को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती बन गई है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण खाद की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं. ऐसे समय में कृषि विभाग ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग की सलाह दी है. विभाग का कहना है कि यदि किसान सही मात्रा, सही समय और सही विधि से उर्वरकों का प्रयोग करें तो न केवल लागत कम होगी, बल्कि फसलों की पैदावार और गुणवत्ता भी बेहतर होगी.
मृदा परीक्षण से शुरू करें पोषक तत्व प्रबंधन
कृषि विभाग के अनुसार, उर्वरकों का उपयोग करने से पहले खेत की मिट्टी की जांच कराना सबसे जरूरी कदम है. मृदा परीक्षण से यह पता चलता है कि खेत में कौन से पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं और किनकी कमी है. इसके आधार पर किसान जरूरत के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग कर सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बिना परीक्षण के उर्वरक डालने से कई बार अनावश्यक खर्च बढ़ जाता है और मिट्टी में पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा हो जाता है. इसलिए अनुमान के बजाय वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर उर्वरीकरण करना अधिक लाभदायक साबित होता है.
केवल यूरिया नहीं, संतुलित उर्वरीकरण है जरूरी
देश में उर्वरकों के उपयोग का पैटर्न अभी भी असंतुलित माना जाता है. कृषि विभाग के अनुसार, किसान अक्सर यूरिया का अधिक प्रयोग करते हैं, जबकि फसलों को नाइट्रोजन के साथ फास्फोरस और पोटाश की भी आवश्यकता होती है. वर्तमान में एन:पी:के का उपयोग अनुपात लगभग 9.3:3.5:1 है, जबकि संतुलित अनुपात 4:2:1 होना चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक यूरिया के उपयोग से पौधे कमजोर हो सकते हैं और कीट व रोगों का खतरा बढ़ सकता है. साथ ही दानों की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है. इसलिए फसल की जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में सभी पोषक तत्वों का उपयोग करना चाहिए.
जैविक खाद और जैव उर्वरकों को बढ़ावा दें
कृषि विभाग किसानों को रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक स्रोतों को भी अपनाने की सलाह दे रहा है. गोबर की सड़ी खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद मिट्टी की संरचना और उर्वरता को बेहतर बनाती हैं. इसके अलावा ढैंचा, सनई और लोबिया जैसी हरी खाद वाली फसलें प्राकृतिक रूप से मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद करती हैं. राइजोबियम, एजोटोबैक्टर और फॉस्फेट घुलनशील बैक्टीरिया जैसे जैव उर्वरक भी फसलों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इनके उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है.
उर्वरकों के उपयोग में इन गलतियों से बचें
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि सूखी मिट्टी में उर्वरकों का प्रयोग न करें और भारी बारिश से पहले खाद डालने से बचें. ऐसी स्थिति में पोषक तत्व बह जाते हैं और उर्वरकों की प्रभावशीलता कम हो जाती है. नाइट्रोजन उर्वरकों को एक बार में देने के बजाय दो या तीन किस्तों में देना अधिक फायदेमंद माना जाता है. विभाग ने यह भी कहा है कि जैव उर्वरकों को रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों के साथ सीधे नहीं मिलाना चाहिए. इसके अलावा समाप्ति तिथि वाले जैव उर्वरकों के उपयोग से बचना चाहिए.