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ज्योतिषीय गणनाओं और एकादशी तिथि के कारण लोग जानना चाहते हैं कि आखिर सही दिन कौन-सा है.
कुछ ज्योतिषी संक्रांति सूर्य के प्रवेश के दिन मानते हैं, जबकि कुछ के अनुसार प्रदोष काल में गोचर होने से पर्व अगले दिन शुभ होता है.
14 जनवरी को षष्टतिला एकादशी है. शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन चावल और तिल का सेवन व दान वर्जित होता है.
मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण की शुरुआत माना जाता है.
14 जनवरी दोपहर 3:07 से शाम 6 बजे तक महापुण्य काल रहेगा, इस समय स्नान और जप का विशेष फल मिलता है.
शास्त्रों के अनुसार सूर्य की हर संक्रांति पर किया गया स्नान, दान और जप अक्षय पुण्य देता है.
गरुड़ पुराण के अनुसार भगवान विष्णु के शरीर से निकली पसीने की बूंदें तिल में परिवर्तित हुईं, इसलिए इसे पवित्र माना गया है.
इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, उड़द, नमक, जलपात्र, लोहा, स्वर्ण और सात प्रकार के अनाज का दान श्रेष्ठ माना गया है.
मकर संक्रांति पर कुछ लोग तुला दान करते हैं, जिसे सोलह महादानों में पहला स्थान दिया गया है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.