मौसम में उतार-चढ़ाव का असर सिर्फ इंसानों पर नहीं, बल्कि पशुओं की सेहत पर भी साफ दिखाई देता है. 

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मौसम बदलते ही पशुओं में सर्दी, जुकाम, बुखार और निमोनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

दुधारू पशुओं में ठंड के दौरान दूध की मात्रा कम हो सकती है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

पशुओं के रहने की जगह को सूखा और हवादार रखें. ठंड से बचाव के लिए बिछावन और उचित व्यवस्था जरूरी है.

पशुओं को दिन में कम से कम 2-3 घंटे धूप मिलनी चाहिए, जिससे उनकी सेहत और रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर रहती है.

ठंड के मौसम में हरा चारा, सूखा भूसा और संतुलित आहार देना जरूरी है. खनिज मिश्रण मिलाने से इम्यूनिटी मजबूत होती है.

सर्द मौसम में पशुओं को ठंडा पानी न दें. हल्का गुनगुना या ताजा पानी देना बेहतर रहता है.

यदि पशु सुस्त दिखे, खांसी या बुखार हो, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. 

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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