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ठंड, गर्मी या बरसात में थोड़ी लापरवाही से उनके बीमार पड़ने का खतरा बढ़ जाता है और दुग्ध उत्पादन प्रभावित हो सकता है.
इसलिए हर पशुपालक को मौसम के हिसाब से अपने पशुओं की देखभाल करना बेहद जरूरी है.
ठंड में पशुओं को ठंडी हवा और नमी से बचाएं, फर्श पर सूखा बिछावन जरूर रखें.
गर्मी में पशुओं को छायादार जगह दें और दिन में पानी का हल्का छिड़काव करें.
बरसात में पानी जमा न होने दें, गंदगी और कीचड़ से संक्रमण फैल सकता है.
हर मौसम में हरा चारा, सूखा भूसा और संतुलित आहार देना जरूरी है. ठंड में गुनगुना, गर्मी में ठंडा पानी दें.
खनिज मिश्रण और नमक का नियमित सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है.
समय-समय पर टीकाकरण और कृमिनाशक दवाओं से गंभीर बीमारियों से बचाव करें.
बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें, संक्रमण रोकने के लिए.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.