कई किसानों के कटहल के पेड़ों से छोटे-छोटे नवजात फल टूटकर गिर रहे हैं. इससे पैदावार और आमदनी पर भी सीधा असर पड़ता है.

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तेज बारिश, अचानक गर्मी या ठंडी हवा कटहल के पेड़ को तनाव में डाल देती है. इससे नवजात फल कमजोर होकर गिरने लगते हैं.

अगर पेड़ को सही मात्रा में खाद और पोषक तत्व नहीं मिलते, तो फल ठीक से विकसित नहीं हो पाते.

फल मकोड़ा, तना छेदक और फफूंद रोग नवजात फलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे वे गिरने लगते हैं.

कभी-कभी पेड़ पर जरूरत से ज्यादा फल लग जाते हैं, जिन्हें पेड़ संभाल नहीं पाता.

कटहल के पेड़ को न ज्यादा पानी दें और न ही सूखा रखें. जल निकास का ध्यान बहुत जरूरी है.

पेड़ के चारों ओर सूखे पत्ते या भूसा डालने से नमी बनी रहती है और जड़ें मजबूत होती हैं.

गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट और संतुलित उर्वरक से फल गिरने की समस्या कम होती है.

रासायनिक दवाओं के बजाय जैविक उपाय ज्यादा सुरक्षित और असरदार होते हैं.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समय पर देखभाल, सही पोषण और नियमित जांच से कटहल के नवजात फल गिरने की समस्या से बचा जा सकता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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