Photo Credit: Canva
फरवरी महीने का पहला पखवाड़ा बीत चुका है. इसके साथ ही गर्मी के मौसम का आगमन हो गया है.
सुबह- शाम हल्की सर्दी रहती है तो दोपर होते ही तेज धूप निकल जाती है. इससे तापमान में अचानक बढ़ोतरी हो रही है.
ऐसे में बढ़ते तापमान का असर इंसान के साथ-साथ फसल और मवेशियों के ऊपर भी पड़ रहा है.
लेकिन इस मौसम का सबसे ज्यादा असर मछलियों के ऊपर देखने को मिल रहा है.
इसलिए फरवरी का महीना मछली पालकों के लिए बहुत ही महत्वूपर्ण हो गया है.
बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने फरवरी महीने में मछलियों की देखभाल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है.
विभाग के मुताबिक, मछली बीज उत्पादक कॉमन कार्प का उत्पादन हैचरी या तालाब में हॉपा विधि से शुरू करें.
तालाब में हर 15 दिन बाद जाल चलाएं, लेकिन पंगेशियस मछली वाले तालाब में जाल नहीं चलाना चाहिए.
पानी के बढ़ते तापमान के अनुसार स्पलीमेंट फीड का इस्तेमाल बढ़ाते रहें. वहीं, जैविक और रासायनिक उर्वरक एक्सपर्ट की सलाह के बिना न डालें.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.