FMD बिजली की तरह फैलती है. एक बीमार पशु से यह तुरंत बाकी बाड़े के पशुओं तक पहुंच जाती है. 

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इसलिए सजग रहना और समय पर रोकथाम करना किसी भी पशुपालक के लिए बेहद जरूरी है.

बीमार पशु को तेज बुखार आता है, वह कांपने लगता है और उसके मुंह, मसूड़ों और जीभ पर छोटे-छोटे छाले दिखाई देते हैं. 

FMD से प्रभावित पशु का दूध अचानक कम हो जाता है. यदि बछड़े बीमार हों, तो उनका दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

यह वायरस हवा, खराब चारा और पानी के जरिए तेजी से फैलता है. एक संक्रमित पशु दूसरों को संपर्क से संक्रमित कर सकता है.

जैसे ही किसी पशु में लक्षण दिखाई दें, उसे तुरंत बाकी पशुओं से अलग कर दें. बीमार का चारा, पानी और बर्तन भी अलग रखें.

संक्रमित पशु के संपर्क में आने वाली जगह पर फिनाइल या लाल दवा का छिड़काव करें. 

पशु के मुंह और खुरों के घाव नीम के पानी या फिटकरी के पानी से धोना फायदेमंद होता है. 

समय पर टीकाकरण FMD का सबसे मजबूत उपाय है. इसके लिए सरकार द्वारा साल में दो बार फ्री टीकाकरण कराया जाता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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