मध्य प्रदेश के किसान सिर्फ फसल से ही नहीं, बल्कि पशुपालन से भी अच्छी आमदनी कमा रहे हैं. 

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गाय, भैंस और बकरी से मिलने वाला दूध, गोबर और अन्य उत्पाद उनकी जीवनशैली में मजबूती लाते हैं. 

लेकिन बदलते मौसम में पशुओं के स्वास्थ्य पर खास ध्यान देना जरूरी है, खासकर सर्दियों और गर्मियों में.

जूं, चिमक्कन और किलनी जैसी कीटें पशुओं की त्वचा में प्रवेश कर खून चूसती हैं, जिससे पशु कमजोर और बीमार पड़ सकते हैं.

गंदे स्थान पर पशु बांधना, नियमित नहलाना न करना और बाड़े की सफाई में लापरवाही परजीवी बढ़ाने का कारण है.

10 एमएल नीम के तेल को 1 लीटर पानी में मिलाकर कपड़े की मदद से पूरे पशु पर लगाने से जूं और परजीवी खत्म हो जाते हैं.

नीम के तेल का मिश्रण दो से तीन सप्ताह में एक बार लगाने से लंबे समय तक जूं और अन्य परजीवियों से राहत मिलती है.

बड़ी किलनी पकड़कर नीम की पत्तियों का पेस्ट लगाना 2–3 दिनों में किलनी को दूर कर देता है.

नीम की पत्तियों को जलाकर बनी राख को पशु के शरीर पर लगाने से किलनी और अन्य परजीवी दूर हो जाते हैं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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