पशुपालन की दुनिया में अगर किसी नस्ल को ‘कमाई का बाहुबली’ कहा जाए, तो वह जाफराबादी भैंस ही है. 

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जाफराबादी भैंस संकट के समय किसानों के लिए एटीएम की तरह काम करती है. दूध बेचकर रोज नकद आमदनी मिलती है.

जहां सामान्य भैंसें 8–10 लीटर तक सीमित रहती हैं, वहीं जाफराबादी भैंस रोज 15 से 16 लीटर तक दूध देती है.

इस भैंस के दूध में फैट की मात्रा अधिक होती है, जिससे घी, मक्खन और खोया ज्यादा निकलता है.

1000 किलो तक वजन, भारी सिर, मुड़े हुए सींग और लंबे कान इसे बाकी नस्लों से अलग बनाती है.

चाहे तेज गर्मी हो या कड़ाके की ठंड, जाफराबादी भैंस आसानी से खुद को मौसम के अनुसार ढाल लेती है.

इस नस्ल की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे पशु डॉक्टर और दवाइयों पर खर्च कम आता है.

महंगी होने के बावजूद इसका नखरा नहीं होता. साधारण देखभाल में भी यह शानदार उत्पादन देती है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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