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राजस्थान से आई यह नस्ल मजबूत, तेजी से बढ़ने वाली और हर मौसम को सहने वाली मानी जाती है.
ये बकरियां हर 6 महीने में 1–2 बच्चे देती हैं, जिससे झुंड जल्दी बढ़ जाता है.
सिरोही नस्ल का दूध पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है, खासकर ब्लड प्लेटलेट्स बढ़ाने में मदद करता है.
सिरोही नस्ल के बकरे वजनदार और तगड़े होते हैं, जिससे मांस की क्वालिटी और प्रोडक्शन दोनों अच्छे मिलते हैं.
ईद या अन्य त्योहारों पर इन बकरों की मांग और दाम दोनों तेजी से बढ़ जाते हैं, जिससे मुनाफा दोगुना हो सकता है.
केवल 4–5 लाख रुपये और 2000 स्क्वायर फीट जगह से 20 बकरियों के साथ बिजनेस शुरू किया जा सकता है.
बकरियों के बच्चे बेचने, दूध और मांस की बिक्री से सालाना 1.5–2 लाख रुपये तक की कमाई संभव है.
लगातार डिमांड और आसान पालन-पोषण के कारण यह बिजनेस लंबे समय तक टिकाऊ और लाभकारी साबित होता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.