गांवों में अक्सर कहा जाता है कि जरूरत के वक्त जो काम आए, वही असली पूंजी होती है. 

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गंजाम नस्ल की बकरी इसी कहावत पर खरी उतरती है. यह बकरी किसानों के लिए चलता-फिरता एटीएम बन चुकी है.

गंजाम बकरी की सबसे बड़ी ताकत इसकी सहनशीलता है. यह नस्ल हर हाल में खुद को आसानी से ढाल लेती है.

इस बकरी की इम्युनिटी अच्छी होती है. इसी वजह से दवाइयों, टीकाकरण और इलाज पर खर्च बहुत कम आता है.

जहां विदेशी नस्लें ज्यादा देखभाल मांगती हैं, वहीं गंजाम बकरी झाड़ियों और साधारण चारे पर भी अच्छे से पल जाती है. 

गंजाम बकरे का मांस स्वादिष्ट और मुलायम होता है. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग सालभर बनी रहती है.

लंबी टांगें, पीछे की ओर मुड़े सींग और मजबूत शरीर इसकी पहचान हैं. नर बकरों की दाढ़ी इसे आकर्षक बनाते हैं.

यह बकरी ज्यादा दूध नहीं देती, लेकिन इसका दूध पोषण से भरपूर होता है. इससे बने घी को औषधीय माना जाता है.

ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में हजारों परिवार गंजाम बकरी के सहारे अपनी आजीविका चला रहे हैं. 

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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