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ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग ऐसी कमाई की तलाश में रहते हैं, जिसमें खर्च कम हो और जोखिम भी न के बराबर.
महंगे दाने, बढ़ती बीमारियों और बाजार की मार के बीच अगर कोई काम भरोसेमंद बनकर उभरा है, तो वह है बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वनराजा नस्ल की मुर्गी को बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग का किंग कहा जाता है.
इसे गांव हो या कस्बा, दोनों जगह आसानी से पाला जा सकता है. सिर्फ 100 वर्ग मीटर के क्षेत्र में इसका पालन संभव है.
सबसे अच्छी बात यह है कि एक मुर्गी साल में करीब 100 से 150 अंडे देती है.
यही वजह है कि छोटे किसान और ग्रामीण परिवार इसे तेजी से अपना रहे हैं.
इस काम की शुरुआत बहुत छोटे स्तर से की जा सकती है. 20 मुर्गियों और 2 मुर्गों से बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग शुरू हो जाती है.
ये मुर्गियां करीब 30 दिनों में आधा से एक किलो तक वजन भी पकड़ लेती हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.