Photo Credit: Canva
ज्यादातर पशुपालक अपनी सुविधा से भैंस को नहला देते हैं, लेकिन पशु विज्ञान इसके उलट सलाह देता है.
सही मौसम, सही पानी और सही तरीका अपनाकर आप अपनी डेयरी का मुनाफा कई गुना बढ़ा सकते हैं.
भैंस की काली और मोटी त्वचा गर्मी ज्यादा सोखती है. गर्मियों में दिन में 2-3 बार नहलाने से हीट स्ट्रेस कम होता है.
ठंड के मौसम में सुबह-सुबह नहलाने से भैंस को निमोनिया और सर्दी-जुकाम का खतरा बढ़ जाता है.
दूध दुहने से पहले भैंस को नहलाने से वह शांत और एक्टिव रहती है. इससे थन और शरीर की गंदगी साफ होती है.
थनों को हल्के गुनगुने पानी से धोने से मैस्टाइटिस (थनैला रोग) का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है.
पुराना साबुन या डिटर्जेंट भैंस की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है. हमेशा पशुओं के लिए बने साबुन का ही इस्तेमाल करें.
नहलाते समय ब्रश से शरीर रगड़ने से खून का संचार बेहतर होता है. इससे भैंस रिलैक्स महसूस करती है.
नहलाने के बाद भैंस को साफ, सूखी और हवादार जगह पर खड़ा करें. सर्दियों में बोरे या तौलिए से पोंछना फायदेमंद रहता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.