अगर खेती के साथ स्थायी कमाई का जरिया चाहिए, तो पशुपालन सबसे भरोसेमंद रास्ता है. 

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लेकिन मुनाफा तभी मिलेगा, जब भैंस की नस्ल सही चुनी जाए. गलत चुनाव पूरे डेयरी बिजनेस को नुकसान में डाल सकता है.

मुर्रा भैंस को डेयरी की जान कहा जाता है. इसका गहरा काला रंग और मुड़े हुए सींग इसकी पहचान हैं. 

भदावरी भैंस छोटे किसानों के लिए फायदे का सौदा है. यह कम चारा खाकर भी अच्छा दूध देती है.

अच्छी भैंस का चेहरा सामने से देखने पर V शेप का होता है. आंखें साफ और चमकदार हों तो समझें पशु पूरी तरह स्वस्थ है.

गर्दन मजबूत, छाती चौड़ी और शरीर संतुलित होना चाहिए. चलते समय भैंस में फुर्ती दिखे, सुस्ती नहीं. 

थन बराबर, मुलायम और नीचे की ओर सही ढंग से लटके होने चाहिए. असमान थन बीमारियां बढ़ा सकते हैं.

भैंस खरीदने से पहले उसके सभी टीकों की जानकारी लें. नाक से पानी गिरना या सांस की दिक्कत बीमारी का संकेत होता है.

चारें के साथ भैंस की सही देखभाल भी जरूरी है. जब दोनों चीजें मिलती हैं, तभी भैंस “काला सोना” साबित होती है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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