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यह मिल्क फीवर जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है, जो समय पर इलाज न मिलने पर नुकसान बढ़ा देती है.
मिल्क फीवर भैंस के शरीर में कैल्शियम की भारी कमी से होने वाली बीमारी है, जो अक्सर ब्याने के तुरंत बाद देखने को मिलती है.
ठंड के मौसम में भैंस का शरीर कैल्शियम को ठीक से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे यह समस्या तेजी से बढ़ जाती है.
इस बीमारी में भैंस का दूध उत्पादन 15 से 20 प्रतिशत तक अचानक कम हो सकता है, जिससे बड़ा नुकसान होता है.
मिल्क फीवर में सबसे पहले भैंस की जुगाली बंद हो जाती है और वह सुस्त व बेचैन नजर आने लगती है.
गर्दन को मोड़कर कोख की तरफ रखना, शरीर ठंडा लगना, खड़े होने में परेशानी और कंपकंपी आना इसके आम लक्षण हैं.
अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो पाचन पूरी तरह बिगड़ सकता है और गंभीर स्थिति में भैंस बेहोश भी हो सकती है.
लक्षण दिखते ही पशु चिकित्सक से संपर्क करें. कैल्शियम की बोतल चढ़ाने से भैंस की हालत तेजी से सुधर सकती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.