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पॉल्ट्री फार्मिंग एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें फायदा जितना है, उतनी ही चुनौतियां और नुकसान की संभावना भी रहती है.
खासकर बदलते मौसम में चूजों की देखभाल सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है.
मौसम की मार, संक्रमण और गलत तापमान की वजह से कई चूजे बड़े होकर बिकने से पहले ही मर जाते हैं. ऐसे में फार्मर्स को नुकसान होता है.
एक्सपर्ट की माने तो बदलते मौसम में मुर्गियों की सुरक्षा और सही वातावरण सुनिश्चित करना सबसे जरूरी है.
उनके अनुसार, चूजों को गर्म रखने के लिए फार्म का पूरा क्षेत्र ढका हुआ होना चाहिए.
अंडे से चूजा निकलने के पहले सप्ताह में तापमान लगभग 35 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए.
दूसरे सप्ताह में यह 30 डिग्री सेल्सियस और तीसरे सप्ताह में 25 डिग्री सेल्सियस तक कम किया जा सकता है.
इस दौरान चूजों के निवास स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति का प्रवेश न हो ताकि संक्रमण का खतरा कम रहे.
तीसरे सप्ताह से 38वें दिन तक, 25 डिग्री सेल्सियस पर चूजे ढाई किलो तक वजनी होकर विकसित हो जाते हैं और बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं.
फार्मर्स को चूजों का वजन ढाई किलो से अधिक नहीं होने देना चाहिए. इससे आहार की खपत बढ़ जाती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.