सर्दियों के आखिरी महीने में पशुओं की देखभाल पर ध्यान देना उनकी सेहत और उत्पादन बनाए रखने के लिए जरूरी है. 

Photo Credit: Canva

छोटे-छोटे उपाय, जैसे साफ-सफाई और पोषणयुक्त आहार, पशुओं को बीमारियों से बचा सकते हैं.

फरवरी में रातें अभी भी ठंडी होती हैं, इसलिए पशुओं को जूट की चादर या कम्बल से ढकें और दिन में धूप में बैठाएं. 

पशुशाला और कुक्कुट फार्म को नियमित रूप से साफ करें. गंदगी में कीटाणु और बीमारियां फैल सकती हैं.

गर्भवती पशुओं को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर आहार दें. इससे मां-बच्चे हेल्दी रहते हैं.

नवजात गाय, भैंस, भेड़ और बकरी को परजीवी नाशक दवाएं नियमित रूप से दें. इससे पेट के कीड़े खत्म होते हैं.

बरसीम की सिंचाई 12-14 दिन और जई की सिंचाई 18-20 दिन के अंतराल पर करें. इससे चारा हरा-भरा रहेगा.

भेड़ और बकरियों को पी.पी.आर. टीकाकरण जरूर कराएं. समय पर टीका लगाने से इस बीमारी को रोक सकते हैं.

अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखें, तो देरी न करें. तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

Next: घर पर बनाएं ये देसी खाद, खिल उठेंगे आपके पौधे!