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ऐसे में जीवामृत खाद पौधों के लिए जैसे किसी संजीवनी से कम नहीं है.
यह मिट्टी में जीवन लौटाती है, जड़ों को मजबूत करती है और बिना केमिकल खाद के गार्डन को हरा-भरा रखती है.
ये मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों को सक्रिय करती है, जिससे पौधों को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व मिलते हैं.
यह खाद पौधों की जड़ों के आसपास का वातावरण संतुलित रखती है और ठंड के मौसम में पौधों की ग्रोथ बढ़ाती है.
जीवामृत का नियमित उपयोग पौधों की इम्युनिटी को बढ़ाती है और फूल व फल जल्दी आने में मदद करता है.
ठंड में मिट्टी में नमी बनाए रखने का काम करता है, जिससे पौधे सूखते नहीं और लंबी अवधि तक उपजाऊ रहते हैं.
इसे पानी में घोलकर जड़ों में दें. ठंड में 10-15 दिन के अंतराल पर आधा लोटा जीवामृत और एक लोटा पानी पर्याप्त है.
जीवामृत बनाने के लिए 30 किलो देसी गाय का गोबर, 1 किलो गुड़ और 1 किलो बेसन लें.
इसे पानी में मिलाकर 15 दिन तक छायादार जगह पर फर्मेंट करें और रोज हल्की हिलाएं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.