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यहां हर सुबह और शाम दूध दुहने की आवाजों से पूरा गांव जागता है, इसी वजह से लोग इसे प्यार से दूध वाला गांव कहते हैं.
झांझर गांव की आबादी करीब 3 हजार है, जबकि गाय भैंस की संख्या 10 हजार से भी ज्यादा है.
यहां पशुपालन कोई साइड काम नहीं, बल्कि पीढियों से चली आ रही एक परंपरा है.
पूरे गांव में सुबह और शाम दूध दुहने और पशु बाड़ों की हलचल से खास रौनक रहती है, जो इस गांव को अलग बनाती है.
गांव से रोजाना क्विंटल के हिसाब से दूध का उत्पादन होता है, जो पूरे जिले में सप्लाई किया जाता है.
इस गांव के दूध की सबसे बड़ी पहचान उसकी शुद्धता है. लोग दूर दूर से खुद गांव आकर दूध लेते हैं.
यहां के दूध से मिठाइयां और दूसरे दुग्ध उत्पाद भी बनाए जाते हैं, जिससे पशुपालकों की कमाई और बढ़ जाती है.
गांव का दूध सिर्फ जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र तक सप्लाई किया जाता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.