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इस तकनीक से उन्नत नस्ल के सीमेन का इस्तेमाल होता है, जिससे अधिक दूध देने वाला बछड़ा मिलने की संभावना बढ़ती है.
कृत्रिम गर्भाधान से कई गायों का गर्भाधान कम समय में किया जा सकता है. इससे नस्ल सुधार तेजी से होता है.
सरकार की डिजिटल सर्विस के जरिए पशुपालक गर्भ और हीट से जुड़े अपडेट मोबाइल पर देख सकते हैं.
सेक्स सॉर्टेड सीमेन के इस्तेमाल से मादा बछी होने की संभावना बढ़ाई जा सकती है, जो डेयरी व्यवसाय के लिए लाभकारी है.
देसी नस्ल की गाय में हीट आने के 12-14 घंटे और संकर नस्ल में 14-16 घंटे बाद गर्भाधान करना सबसे उपयुक्त रहता है.
गर्भाधान के करीब 90 दिन बाद गर्भ जांच कराना जरूरी है. कई बार गर्भ न ठहरने के पीछे अंदरूनी संक्रमण होता है.
सही समय, सही देखभाल और विशेषज्ञ की सलाह से डेयरी व्यवसाय में सुधार आता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.