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फरवरी महीने में की गई सही तैयारी से अप्रैल-मई में भी गाय-भैंसों को पौष्टिक हरा चारा खिलाया जा सकता है.
तेज धूप और पानी की कमी के कारण ज्यादातर हरी फसलें सूख जाती हैं, जिससे पशुओं को सूखा चारा देना पड़ता है.
सही पोषण न मिलने पर गाय-भैंस कमजोर हो जाती हैं और दूध उत्पादन में साफ गिरावट देखने को मिलती है.
अगर फरवरी में चारे की फसल बो दी जाए, तो बीज अच्छे से जमते हैं और अप्रैल-मई में भी खेतों में हरियाली बनी रहती है.
बरसीम कम लागत में उगने वाली फसल है, जिसमें प्रोटीन भरपूर होता है. इससे पशु तंदुरुस्त रहते हैं.
अल्फाल्फा एक बारहमासी फसल है, जो एक बार लगाने के बाद लंबे समय तक हरा चारा देती है और साल भर काम आती है.
नेपियर घास तेजी से बढ़ती है, बार-बार कटाई देती है और गर्मी से लेकर हल्की ठंड तक भरोसेमंद चारा है.
लोबिया गर्मी में आसानी से उग जाती है, पशु इसे शौक से खाते हैं और कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.