पशुपालक धीरे-धीरे समझ रहे हैं कि ड्राई पीरियड क्यों जरूरी है. ये अगले दुग्धकाल में बेहतर दूध पाने का आसान तरीका है.

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गर्भावस्था के 7वें या 8वें महीने से दूध को धीरे-धीरे बंद करना ड्राई पीरियड कहलाता है. 

अगर लगातार दूध निकाला जाता है, तो थन कमजोर हो सकते हैं और अगले दुग्धकाल में दूध की मात्रा कम हो सकती है. 

गाय का गर्भकाल लगभग 9 महीने 9 दिन और भैंस का 10 महीने 10 दिन होता है.

गर्भावस्था के अंतिम तीन हफ्तों में भूसे की मात्रा घटाकर दाने की मात्रा रोज लगभग 100 ग्राम बढ़ा दें. 

गर्भ के अंतिम चरण में कैल्शियम और मिनरल की मात्रा 15 ग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. 

ड्राई पीरियड के दौरान थन को आराम मिलता है, जिससे ऊतक खुद को रिपेयर करते हैं और अगले दुग्धकाल में उत्पादन बढ़ता है.

संतुलित और पौष्टिक आहार से बछड़ा स्वस्थ रहता है और जन्म के बाद दूध उत्पादन भी बेहतर होता है.

समय पर ड्राई पीरियड अपनाने से नुकसान से बचा जा सकता है और भविष्य में दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बढ़ती हैं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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