Photo Credit: Canva
मजबूत शरीर, सहनशक्ति और कम देखभाल में बढ़िया उत्पादन की वजह से ये किसानों की पहली पसंद बन रही है.
थारपारकर गाय नियमित और स्थिर दूध उत्पादन देती है. अच्छा रिटर्न मिलने के कारण पशुपालक इसे दुधारू सोना कहते हैं.
इस गाय की सहनशक्ति इसकी सबसे बड़ी ताकत है. हर मौसम में यह आसानी से ढल जाती है.
थारपारकर गाय प्रतिदिन औसतन 15 से 18 लीटर दूध देती है, जो इसे बेहतरीन देसी नस्लों में शामिल करता है.
एक ब्यांत में यह गाय करीब 1500 से 2200 लीटर तक दूध दे सकती है, जिससे डेयरी में स्थिर आमदनी बनी रहती है.
इसका रंग सफेद या हल्का धूसर होता है. पीठ पर हल्की आसमानी धारियां और लंबी पतली पूंछ इसकी खास पहचान हैं.
थारपारकर गाय कम बीमार पड़ती है. इससे दवाइयों और पशु चिकित्सक पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाता है.
इस नस्ल को किसी विशेष या महंगे चारे की आवश्यकता नहीं होती. हरा चारा, सूखा भूसा और संतुलित आहार ही पर्याप्त है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.