मौसम का बदलता मिजाज सिर्फ इंसानों को ही नहीं, बल्कि पशुओं को भी प्रभावित करता है. 

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बढ़ती गर्मी के साथ दुधारू पशुओं में दूध की कमी और काम करने वाले पशुओं में थकान बढ़ना आम हो जाता है. 

तापमान बढ़ने से पशुओं के शरीर पर दबाव बढ़ता है. वे कम चारा खाते हैं, ज्यादा पानी पीते हैं और सुस्ती महसूस करते हैं.

अगर दुधारू पशु पहले से कम दूध दे रहे हैं, तो यह मौसम परिवर्तन का संकेत हो सकता है. 

पशु अपनी परेशानी बोलकर नहीं बता सकते. जल्दी थकना, बार-बार बैठना या सुस्त रहना उनकी असहजता का संकेत है.

चारा कम खाना, मुंह से झाग आना, गोबर में बदबू या ढीलापन जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं. 

शेड में पंखे या कूलर लगाएं. टीन की छत पर पानी का छिड़काव या घास डालकर तापमान कम किया जा सकता है. 

गर्मी में शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पशुओं को हमेशा साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराएं.

गर्मी में 70-75% हरा चारा जैसे बरसीम, हरा मक्का या साइलेज दें. इससे शरीर में नमी बनी रहती है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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