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चारा कम हुआ तो सीधा असर दूध पर पड़ता है और आमदनी घटने लगती है.
लेकिन अगर सही समय पर सही चारे की फसल उगा ली जाए, तो यही गर्मी मुनाफे का मौसम बन सकती है.
लोबिया तेजी से बढ़ने वाली चारा फसल है, जिसमें प्रोटीन, कैल्शियम और फॉस्फोरस भरपूर होता है.
मक्का और ज्वार की खेती कर किसान हरे चारे की कमी काफी हद तक दूर कर सकते हैं. ये फसलें पशुओं को ऊर्जा देती हैं.
संकर नेपियर घास में प्रोटीन, रेशा और कैल्शियम संतुलित मात्रा में होता है जो पशुओं के लिए फायदेमंद होती है.
नेपियर घास को लोबिया या बरसीम जैसे दलहनी चारे के साथ मिलाकर खिलाने से पशुओं को ज्यादा पोषण मिलता है.
बरसीम घास दूध बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है. भूसे में बरसीम मिलाकर खिलाने से पशु स्वस्थ रहते हैं.
ज्वार की चरी को तब काटना चाहिए जब उसमें लगभग 55% फूल आ जाएं. इस अवस्था में ज्वार ज्यादा पौष्टिक होता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.