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धर्म, दर्शन और कहानियों से निकलकर अब इस सवाल का जवाब विज्ञान ने ठोस सबूतों के साथ दे दिया है.
विज्ञान के मुताबिक जब धरती पर पक्षी भी नहीं थे, तब समुद्र के जीव अंडों के जरिए ही अपनी नस्ल बढ़ा रहे थे.
डायनासोर के दौर में कठोर खोल वाले अंडे मौजूद थे, जबकि मुर्गी बहुत बाद में विकसित हुई. इससे साफ है कि अंडा पहले आया.
अंडे ने जीवों को पानी से बाहर निकलकर सूखी जमीन पर रहने की आजादी दी. यह विकास की सबसे बड़ी छलांग मानी जाती है.
मुर्गी के अंडे का खोल बनाने के लिए OC-17 नाम का प्रोटीन चाहिए, जो सिर्फ मुर्गी के अंडाशय में बनता है.
बिना मुर्गी के शरीर के, मुर्गी का अंडा बन ही नहीं सकता. इस लिहाज से देखें तो पहले मुर्गी आई.
रिसर्च बताती है कि मुर्गी के शुरुआती सरीसृप पूर्वज अंडे नहीं देते थे, बल्कि सीधे बच्चे जनते थे.
विकास के दौरान जीवों ने अंडे देने की आदत अपनाई, क्योंकि कठोर खोल बच्चों को सुरक्षित रखता था.
एक “लगभग मुर्गी” जैसे पक्षी के अंडे में छोटा सा जेनेटिक बदलाव हुआ और उसी अंडे से पहली असली मुर्गी पैदा हुई.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.