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कई बार वजह चारा या दवा नहीं, बल्कि वो छोटे-छोटे दुश्मन होते हैं जो चुपचाप खून चूसकर पशु की सेहत छीन लेते हैं.
जब मक्खी-मच्छर पशु को लगातार काटते हैं, तो वह तनाव में आ जाता है. इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है.
रातभर पैर पटकना, बार-बार पूंछ हिलाना और खड़े-खड़े करवट बदलना इस बात का संकेत है कि पशु चैन में नहीं है.
मक्खी-मच्छर सिर्फ खून नहीं चूसते, बल्कि लम्पी जैसे खतरनाक चर्म रोग फैलाने का कारण भी बनते हैं.
नीम का तेल प्राकृतिक कीटनाशक है और कपूर की तेज खुशबू मक्खी-मच्छरों को पास नहीं आने देती.
1 लीटर नीम तेल में 100 ग्राम पिसा कपूर मिलाकर आप स्प्रे बना सकते हैं. ये केमिकल स्प्रे से कहीं बेहतर होता है.
शाम के समय पशु के शरीर पर हल्का स्प्रे करें और गौशाला के कोनों, दीवारों व नालियों में भी छिड़काव करें.
इस मिश्रण के नियमित इस्तेमाल से बैक्टीरिया और कीटाणु पनप नहीं पाते, जिससे त्वचा रोगों का खतरा कम हो जाता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.