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थोड़ी सी लापरवाही पशुपालकों को बड़ा नुकसान दे सकती है, जबकि सही समय पर लिए गए फैसले मुनाफा बढ़ा सकते हैं.
गाय या भैंस को बच्चा देने से करीब 2 महीने पहले दूध पूरी तरह बंद कर देना चाहिए. इससे थन को आराम मिलता है.
एकदम दूध बंद करने के बजाय गर्भावस्था के 7वें या 8वें महीने से दूध निकालने की मात्रा धीरे-धीरे घटानी चाहिए.
गाभिन पशु से आखिरी समय तक दूध निकालते रहने से थन कमजोर हो जाते हैं और अगली बार दूध उत्पादन कम होता है.
ड्राई पीरियड न देने पर दूध ज्वर यानी मिल्क फीवर की आशंका बढ़ जाती है, जो पशु के लिए जानलेवा भी हो सकती है.
गर्भावस्था के आखिरी तीन हफ्तों में भूसे की मात्रा थोड़ी घटाकर दाना रोज करीब 100 ग्राम तक बढ़ाना फायदेमंद होता है.
कैल्शियम और मिनरल 15 ग्राम से ज्यादा नहीं देना चाहिए, वरना बच्चा होने के बाद मिल्क फीवर की समस्या हो सकती है.
ड्राई पीरियड और संतुलित आहार देने से न सिर्फ पशु स्वस्थ रहता है, बल्कि अगली ब्यांत में दूध भी ज्यादा देता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.