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पोषण की कमी, गलत खान-पान, प्रसव के बाद देखभाल की कमी और हार्मोनल असंतुलन इसका कारण हो सकते हैं.
कभी-कभी पशु हीट में आ जाता है, लेकिन हल्की बेचैनी, ज्यादा एक्टिव होना या हल्का मूवमेंट जैसे संकेत अनदेखे रह जाते हैं.
बाजरा, भूसी, खली, मसूर, अरहर और चूनी जैसे दाने पशु को हीट में लाने में मदद करते हैं.
आधा किलो फर्मेंटेड चावल को एक लीटर पानी में मिलाकर पिलाने से 5–7 दिनों में पशु हीट में आने की संभावना बढ़ जाती है.
प्रजना और जनोवा जैसी दवाइयां हार्मोन बैंलेस कर हीट साइकिल को रेगुलर करती हैं (वेटरनरी डॉक्टर की सलाह से दें).
पशु बार-बार आवाज करता है, बेचैनी दिखाता है, टहलता रहता है और ज्यादा पेशाब करता है.
हीट के लक्षणों को पहचानकर समय पर गर्भधारण करवाने से उत्पादन और व्यवसाय दोनों बेहतर होते हैं.
संतुलित पोषण, सही खान-पान और हल्की देखभाल से पशु की हीट नियमित रहती है और किसान का मुनाफा बढ़ता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.