सर्दियों में मछली पालन सिर्फ अनुभव से नहीं, बल्कि सही वैज्ञानिक तरीके अपनाने से सफल होता है. 

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जनवरी में मछलियों की गतिविधि कम हो जाती है, ऐसे में विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार ही काम करें.

जब तापमान 15°C से नीचे चला जाए और मछलियां दाना न लें, तो जबरदस्ती आहार डालना नुकसानदायक होता है. 

प्राकृतिक भोजन बनाए रखने के लिए हर 10–15 दिन पर चूना, एसएसपी, मिनरल मिक्चर और खल्ली का घोल तालाब में डालें.

जनवरी के आखिरी सप्ताह से पहले नर और मादा कार्प मछलियों को अलग तालाबों में रखें.

सर्दियों में आरगुलस जैसे परजीवी तेजी से फैलते हैं. बचाव के लिए सुबह 10 से दोपहर 2 के बीच दवाओं का छिड़काव करें. 

मछलियों में फफूंद और त्वचा रोग से बचाने के लिए प्रति एकड़ 40–50 किलो नमक का घोल बनाकर तालाब में डालें.

अगर तालाब का पानी अत्यधिक हरा दिखे, तो तुरंत चूना और खाद डालना बंद कर दें. 

सर्दियों में कार्प मछलियों के लिए 5–6 फीट और पंगेरियस के लिए 8–10 फीट पानी रखना जरूरी है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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