बाजार की हल्दी अक्सर पुरानी या रसायनों से उपचारित होती है, जिससे स्वाद और गुण कम हो जाते हैं. 

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वहीं घर पर उगाई हल्दी पूरी तरह ताजी, प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक होती है. 

हल्दी को हल्की, भुरभुरी और नमी पकड़ने वाली मिट्टी पसंद है. मिट्टी में थोड़ी रेत और सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं.

हल्दी के बीज की जगह कच्चे हल्दी के कंद लगाए जाते हैं. बिना सड़न और फफूंद वाले कंद ही चुनें.

हल्दी के कंदों को 2-3 इंच के टुकड़ों में काटकर 1-2 दिन छाया में सुखाएं. इससे कटे हुए हिस्से सड़ते नहीं.

मध्यम आकार के गमले में हल्दी लगाएं, नीचे पानी निकलने का छेद हो. कंद की आंख ऊपर की ओर रखें.

हल्दी को नमी पसंद है, लेकिन अधिक पानी नुकसानदेह है. मिट्टी हमेशा हल्की गीली रखें और गर्मियों में रोज थोड़ा पानी दें.

हल्दी को तेज धूप पसंद नहीं. इसे सुबह की हल्की धूप और बाकी समय छांव वाली जगह पर रखें.

हल्दी के पौधे 8-10 महीने में तैयार हो जाते हैं. पत्तियां पीली पड़ने पर कंद तैयार समझें और मिट्टी हटाकर हल्दी निकालें.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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