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सही देखभाल और प्राकृतिक उपाय अपनाकर आप इसे झाड़ीदार, घना और लंबे समय तक हरा-भरा रख सकते हैं.
तुलसी पर बनने वाली मंजरी पौधे की ऊर्जा बीज बनाने में लगा देती है. कैंची से मंजरी को काटकर हटा दें.
हल्दी प्राकृतिक एंटी-फंगल और एंटी-सेप्टिक है. एक चम्मच हल्दी को एक लीटर पानी में घोलकर पौधे पर स्प्रे करें.
उपयोग की हुई चाय पाउडर में नाइट्रोजन की मात्रा होती है. इसे धोकर सुखाने के बाद मिट्टी में मिलाएं.
सर्दियों में पानी की वजह से मिट्टी सख्त हो जाती है. खुरपी से मिट्टी की हल्की गोड़ाई करें और उसमें सूखी गोबर की खाद मिलाएं.
नीम प्राकृतिक कीट और फंगस निरोधक है. इसके सूखे पत्तों को पाउडर बनाकर मिट्टी में मिलाएं और पानी दें.
फरवरी में तुलसी को अधिक पानी न दें. सूर्योदय के समय पानी देना सबसे अच्छा माना जाता है. इससे जड़ें सड़ती नहीं हैं.
काठ की छाई पोटाश प्रदान करती है और पौधे को ठंड से बचाती है. केवल प्राकृतिक काठ की छाई मिट्टी में छिड़कें.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.