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अगर गेहूं के दाने सही तरह से विकसित नहीं होते, तो उत्पादन में 20 से 40 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है.
कई बार फसल देखने में अच्छी लगती है, लेकिन दानों का वजन कम होने के कारण मंडी में गेहूं को कम कीमत मिलती है.
नाइट्रोजन, पोटाश, जिंक और सल्फर की कमी से गेहूं का दाना पूरी तरह नहीं भर पाता.
कई किसान समय पर पानी तो दे देते हैं, लेकिन पोषण पर ध्यान नहीं देते. सही समय पर खाद और दवा देना जरूरी है.
जब गेहूं की फसल में गांठ बन रही होती है, उसी समय सही खाद और दवा की सबसे ज्यादा जरूरत होती है.
गेहूं में दाना पतला होने से बचाने के लिए इफको सागरिका, बोरेक्स और NPK मिलाकर स्प्रे करें.
इन दवाओं का छिड़काव केवल गाभे की अवस्था या गांठ बनने के समय ही करना चाहिए. फूल आने के बाद स्प्रे न करें.
अगर किसान सही समय पर सही मात्रा में पोषक तत्वों का उपयोग करें, तो गेहूं के दाने मजबूत होंगे.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.