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जैसे ही सर्द हवाएं तेज होती हैं और शीत लहर चलने लगती है, वैसे ही इंसानों के साथ-साथ पशुओं की परेशानी भी बढ़ जाती है.
गांवों में अक्सर देखा जाता है कि ठंड के मौसम में पशु सुस्त हो जाते हैं, खाना कम खाते हैं और बीमार पड़ने का खतरा बढ़ जाता है.
पशुपालन निदेशालय के अनुसार, सर्दी शुरू होने से पहले ही पशुओं को कीड़ा मारने वाली दवा जरूर दे देनी चाहिए.
इससे पेट के कीड़े खत्म होते हैं और पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है.
इसके साथ-साथ खुरपका-मुंहपका, पीपीआर और इन्टेरोटॉक्सिमिया जैसे खतरनाक रोगों के खिलाफ टीकाकरण भी जरूरी है.
ठंड में ये बीमारियां तेजी से फैलती हैं, इसलिए पहले से बचाव करना ही समझदारी है.
शीतलहर के समय पशुओं को खुले या नमी वाले स्थानों पर रखना उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है.
विभाग का कहना है कि पशुओं को हमेशा सूखे, साफ और धुआं-रहित स्थान पर रखें.
कई बार ठंड से बचाने के लिए लोग बंद कमरे में आग जलाते हैं, जिससे धुआं भर जाता है और पशुओं को सांस की समस्या हो सकती है.
इसलिए हवा के निकलने का रास्ता जरूर रखें और फर्श पर पुआल या सूखा बिछावन डालें, ताकि ठंड जमीन से सीधे पशु के शरीर में न लगे.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.