कम लागत और ज्यादा मुनाफे की बात हो, तो गोट फार्मिंग आज पशुपालकों की पहली पसंद बनती जा रही है. 

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लेकिन सिर्फ बकरी पालना ही काफी नहीं, सही देखभाल, पोषण और मैनेजमेंट से ही असली मुनाफा मिलता है.

बकरी के बच्चे के जन्म के बाद पहले 4–5 दिन तक खीस (पहला दूध) पिलाना बेहद जरूरी है. 

बच्चों को मां से अलग करने के बाद दिन में 2–3 बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दूध पिलाएं. 

बकरी के बच्चों को धीरे-धीरे स्टार्टर फीड, अच्छी क्वालिटी का द्विदलीय सूखा चारा और खनिज मिश्रण देना शुरू करें. 

गाभिन बकरियों को सामान्य चारे के साथ अतिरिक्त पोषण देना जरूरी है, खासकर गर्भावस्था के अंतिम समय में. 

दूध उत्पादन के दौरान बकरी के वजन, दूध की मात्रा, मौसम और चारे की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर आहार तय करें. 

सर्द मौसम में बकरियों की शरीर की चर्बी ज्यादा खर्च होती है. इसलिए इस समय दाने की मात्रा बढ़ाना जरूरी है.

गोट फार्मिंग में खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है. समय पर टीकाकरण जरूर करवाएं

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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