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भारत का लगभग आधा चाय उत्पादन असम से होता है, इसलिए इसे “भारत का चाय बागान” कहा जाता है.
19वीं सदी की में असम में जंगली चाय के पौधों की खोज हुई, जिसने इसे दुनिया के प्रमुख चाय उत्पादक राज्यों में शामिल किया.
असम में 800 से अधिक चाय बागान हैं, जो ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों की उपजाऊ घाटियों में फैले हैं.
असम की चाय का स्वाद मजबूत, रंग एम्बर और मिठास माल्टी होती है, जो इसे भारत और विदेशों में पसंदीदा बनाती है.
अधिक बारिश, नम मौसम और पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी असम की चाय के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान करती हैं.
असम के चाय बागानों के आसपास बसे समुदाय अपनी परंपराओं, त्योहारों और संगीत के लिए जाने जाते हैं.
महिलाएं सावधानी से सबसे अच्छी दो पत्तियां और एक कली चुनती हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली चाय तैयार होती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.