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खीरे की ऑफ-सीजन खेती ऐसी ही एक स्मार्ट रणनीति है, जो कम समय में ज्यादा कमाई का रास्ता खोल देती है.
जनवरी में बोया गया खीरा मार्च की शुरुआत में तैयार होता है, जब बाजार में मांग ज्यादा और आवक कम होती है.
उत्तर भारत की ठंड में सीधे खेत में बुवाई जोखिम भरी हो सकती है. लो-टनल विधि में प्लास्टिक शीट पौधों को पाले से बचाती है.
पंत संकर-1: यह किस्म सिर्फ 50 दिनों में पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है.
पीसीयूएच-3: आईसीएआर द्वारा विकसित यह किस्म मोजेक वायरस और पाउडरी मिल्ड्यू के खिलाफ मजबूत मानी जाती है.
पोइन्सेट किस्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता है. ये 50–55 दिनों में तैयार हो जाती है.
डीसीएच-1: यह किस्म भारी उत्पादन के लिए जानी जाती है. इससे 250–270 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज ले सकते हैं.
जो किसान अभी भी बुवाई करना चाहते हैं, उनके लिए पूसा उदय एक बेहतरीन विकल्प है.
जनवरी में उन्नत किस्मों का चुनाव और वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर किसान कम लागत में जल्दी फसल लेते हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.