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उदयातिथि की मान्यता के अनुसार इस साल पितृ पक्ष की 8 सितंबर से शुरू हो रहा है.
यह भाद्रपद माह की शुक्ल पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है.
पितृ पक्ष में हम अपने पूर्वजों को सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.
जल, तिल और कुशा से तर्पण करना पितरों की आत्मा की शांति के लिए जरूरी माना जाता है.
चावल, जौ और तिल से बने पिंडों का समर्पण घर पर या पवित्र नदियों के किनारे किया जाता है.
गया, वाराणसी जैसे पवित्र स्थानों पर पिंडदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
सात्विक भोजन कराना और दक्षिणा, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान करना पितरों की कृपा दिलाता है.
श्राद्ध और तर्पण से पितृ दोष कम होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.