मुर्गीपालन अब सिर्फ सहायक काम नहीं, बल्कि किसानों की कमाई की रीढ़ बन चुका है. 

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लेकिन सर्दियों की हल्की सी चूक पूरे पोल्ट्री फार्म को तबाह कर सकती है, खासकर ईकोलाइ जैसी खतरनाक बीमारियां.

ईकोलाइ बैक्टीरिया गंदे चारे और दूषित पानी से मुर्गियों के शरीर में प्रवेश करता है. इसलिए रोजाना साफ पानी दें.

खूनी दस्त, सुस्ती, पंखों का खड़ा होना और सांस लेने में दिक्कत-ये ईकोलाइ के शुरुआती संकेत हैं. 

यह बीमारी सिर्फ छोटे चूजों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वयस्क मुर्गियों को भी तेजी से अपनी चपेट में ले लेती है.

पोल्ट्री शेड की नियमित सफाई और कीटाणुनाशक का उपयोग ईकोलाइ रोकने का सबसे कारगर तरीका है. 

फार्म में काम करने वालों के लिए अलग कपड़े, जूते और मास्क जरूरी करें. शेड में घुसने से पहले सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.

पोल्ट्री शेड ऊंची जगह पर होना चाहिए ताकि पानी जमा न हो. आसपास गंदे नाले बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं.

मरी हुई मुर्गियों को जलाएं या गड्ढा खोदकर दफनाएं और समय-समय पर पशु चिकित्सक से टीकाकरण की सलाह लेते रहें.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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