मुर्गी पालन किसानों के लिए आय का बढ़ता स्रोत बन रहा है, लेकिन शुरुआती गलतियों से नुकसान भी हो सकता है. 

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सही जानकारी और समय पर सावधानी से आप इस व्यवसाय को मुनाफ़े का स्थायी जरिया बना सकते हैं.

मुर्गियों की शुरुआती उम्र में पतला बीट आम समस्या होती है, जिसका असर उनकी सेहत और वजन बढ़ने पर पड़ता है.

समय पर बीट की जांच न करने पर फीड कन्वर्जन रेशियो (FCR) बढ़ जाता है, जिससे चारा ज्यादा लगता है.

मुर्गियों का बीट सफेद, मटमैला या गाढ़ा हो सकता है. सामान्य स्थिति में गाढ़ा होना चाहिए. पतला बीट पाचन समस्या का संकेत है.

माइक्रोगार्ड जैसे प्रोबायोटिक दवा पानी या चारे में देने से 2-3 दिनों में बीट सामान्य हो जाता है और पाचन तंत्र मजबूत होता है.

सिर्फ दवा पर भरोसा न करें. मुर्गियों के पिंजरे और चारागाह की साफ-सफाई जरूरी है.

मुर्गियों को हमेशा साफ पानी और संतुलित आहार दें, ताकि उनका स्वास्थ्य और उत्पादन बेहतर बना रहे.

शुरुआती दिनों में तापमान और माहौल का नियंत्रण जरूरी है, ठंड या गर्मी से मुर्गियों का विकास प्रभावित हो सकता है.

मुर्गियों की गतिविधियों और बीट की समय-समय पर जांच से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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