सर्दियों में पोल्ट्री फार्मिंग मुनाफे का सौदा तो है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही पूरे बिजनेस को घाटे में बदल सकती है. 

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खासकर जब चूजे आपस में सटने लगें, तो यह ठंड का असर नहीं बल्कि एक बड़ा चेतावनी संकेत होता है.

ठंड में चूजे गर्मी पाने के लिए एक-दूसरे से सटते हैं, लेकिन ज्यादा सटना तापमान या रोशनी की कमी दर्शाता है. 

जब चूजे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ते हैं, तो कमजोर चूजों की मौत का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है. 

छोटे चूज़ों को ज्यादा गर्मी चाहिए. शेड में तापमान सही होते ही चूजे खुद फैलने लगते हैं और आपस में दूरी बना लेते हैं.

दिन में प्राकृतिक रोशनी काफी होती है, लेकिन शाम और रात में बल्ब या हाइलोजन लाइट जरूरी है. 

शेड में ठंडी हवा का सीधा प्रवेश न हो. इसके लिए मोटी हरी चादर या जूट के बोरे का इस्तेमाल करें.

मक्का, बाजरा, जई, सूरजमुखी के बीज और हाई प्रोटीन फीड दें. छोटे चूजों को गुड़ मिला गुनगुना पानी देना भी फायदेमंद है.

फर्श पर भूसी का इस्तेमाल करें. यह देर से गीली होती है और बदबू नहीं करती, जबकि पैरा जल्दी सड़कर अमोनिया गैस छोड़ता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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