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ब्लैक बंगाल बकरी पालन इसी सोच पर खरा उतरता है और छोटे किसानों के लिए बड़ी कमाई का रास्ता खोलता है.
ब्लैक बंगाल बकरी आकार में भले ही छोटी होती है, लेकिन मुनाफे के मामले में यह बड़ी नस्लों को भी पीछे छोड़ देती है.
यह बकरी गर्मी, उमस और हल्की ठंड-हर मौसम में खुद को आसानी से ढाल लेती है, जिससे बीमारी का खतरा कम रहता है.
ज्यादातर ब्लैक रंग की होने के कारण इसका चमड़ा बहुत मुलायम होता है, जिसकी चमड़ा उद्योग में अच्छी कीमत मिलती है.
इन्हें महंगे शेड या बड़े बाड़े की जरूरत नहीं होती. बस सूखी और साफ जगह हो तो बकरियां आराम से पल जाती हैं.
हरे चारे, खेतों के अवशेष, अनाज और पेड़ों की पत्तियों से इनका पोषण हो जाता है, जिससे चारे पर खर्च कम आता है.
यह बकरी 3-4 महीने तक दूध देती है और एक वयस्क बकरी से 18-20 किलो तक अच्छा मांस मिलता है.
ब्लैक बंगाल बकरी जल्दी प्रजनन करती है, जिससे कम समय में झुंड बड़ा हो जाता है और कमाई के मौके बढ़ते हैं.
कम जमीन, कम पूंजी और कम जोखिम के साथ यह नस्ल किसानों की आमदनी बढ़ाने का मजबूत जरिया बन सकती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.