आज के समय में मछली पालन किसानों के लिए खेती के साथ-साथ कमाई का मजबूत सहारा बनता जा रहा है. 

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कम लागत और सही तकनीक अपनाई जाए तो तालाब से अच्छा-खासा मुनाफा निकाला जा सकता है.

मछली पालन के लिए बहुत छोटा तालाब नुकसानदेह हो सकता है. तालाब कम से कम 0.2 हेक्टेयर का होना चाहिए.

तालाब की दिशा पूर्व से पश्चिम रखने पर धूप ज्यादा देर तक पानी पर पड़ती है. इससे पानी में ऑक्सीजन अच्छे से बनता है.

तालाब की गहराई 1.5 से 2 मीटर होनी चाहिए. इससे गर्मी-सर्दी में पानी का तापमान बैलेंस रहता है.

बहुत छोटे बच्चों को डालने से मरने का खतरा बढ़ जाता है. 4 से 6 इंच साइज के मछली बीज ज्यादा सुरक्षित होते हैं.

रोहू, कतला और मृगल जैसी मछलियां भारतीय मौसम में बेहतर परिणाम देती हैं. इनकी मांग बाजार में भी ज्यादा रहती है.

मछलियों को संतुलित आहार और समय-समय पर फीड देना जरूरी है. सही खान-पान से मछलियों की ग्रोथ तेज होती है.

तालाब की सफाई, देखरेख और बीमारी से बचाव पर ध्यान देकर ही कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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