खेती में बढ़ती लागत और मौसम की मार ने किसानों को नए विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है. 

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ऐसे समय में मुर्गी पालन एक ऐसा व्यवसाय बनकर उभरा है, जो कम जोखिम में नियमित आमदनी का भरोसा देता है. 

मुर्गी पालन घर के पास या थोड़ी सी खाली जमीन में पोल्ट्री शेड बनाकर शुरू किया जा सकता है.

किसान 10–15 मुर्गियों से भी शुरुआत कर सकते हैं. इससे अनुभव मिलता है और नुकसान की संभावना कम रहती है.

अंडे और चिकन की खपत पूरे साल रहती है. त्योहार हो या सामान्य दिन, बाजार में इसकी कमी नहीं होती.

कड़कनाथ, वनराजा और ग्रामप्रिया जैसी नस्लें कम खर्च में ज्यादा उत्पादन देती हैं और बीमारियों का खतरा भी कम रहता है.

कड़कनाथ का मांस औषधीय गुणों के कारण महंगे दाम पर बिकता है. यह सामान्य मुर्गियों से कई गुना ज्यादा मुनाफा देती है.

ग्रामप्रिया जैसी नस्लें जल्दी अंडे देना शुरू कर देती हैं और सालभर लगातार अंडे देती हैं, जिससे हर महीने स्थिर आमदनी होती है.

नेशनल लाइवस्टॉक मिशन के तहत पोल्ट्री फार्म पर 50% तक सब्सिडी भी मिलती है. 

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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