किसान अब सिर्फ खेत ही नहीं, बल्कि पशुपालन को भी आय का मजबूत जरिया बना रहे हैं. 

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सीमित जमीन और संसाधनों के बावजूद भेड़ पालन छोटे और मध्यम किसानों के लिए मुनाफे का साधन बन गया है.

मुजफ्फरनगरी नस्ल तेजी से बढ़ती है और छह महीने में 25-30 किलो वजन बढ़ा सकती है. 

मुजफ्फरनगरी भेड़ें सफेद रंग की, लंबे कान वाली और हल्की मुड़ी नाक वाली होती हैं. ये देखने में आकर्षक लगती है.

इन भेड़ों के मटन का स्वाद संतुलित होती है. वजन के आधार पर बिक्री होने के कारण किसानों को सीधे लाभ मिलता है.

मुजफ्फरनगरी नस्ल से सालाना लगभग 1 किलो ऊन मिलती है, जिसका उपयोग कंबल और ऊनी कपड़े बनाने में होता है.

गद्दी नस्ल से मांस, दूध और ऊन तीनों मिलते हैं. यह नस्ल सफेद, काले और भूरे रंग में पाई जाती है.

गद्दी नस्ल का दूध पौष्टिक और हेल्दी होता है, और इसका घी भी उच्च कीमत पर बिकता है. 

दोनों नस्लें गर्म और नमी वाली जलवायु में आसानी से ढल जाती हैं. इनमें उपचार पर खर्च भी कम आता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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