अक्सर किसान ट्रैक्टर खरीदते समय टायर को हल्के में ले लेते हैं, जबकि यही टायर खेती की लागत तय करते हैं. 

Photo Credit: Canva

सस्ता टायर जल्दी घिसता है, ग्रिप कमजोर होती है और बार-बार बदलना पड़ता है, जिससे कुल खर्च बढ़ जाता है.

जरूरत से ज्यादा भार पड़ने पर टायर अंदर से कमजोर हो जाता है और फटने का खतरा बढ़ जाता है.

गलत स्पीड रेटिंग वाला टायर गर्म होकर जल्दी खराब हो सकता है, खासकर सड़क पर ढुलाई के दौरान.

मिट्टी के हिसाब से गलत ट्रेड पैटर्न लेने से ट्रैक्टर फिसलता है और डीजल ज्यादा खर्च होता है.

खेत और सड़क—दोनों के लिए एक ही तरह का टायर लेना कई बार नुकसानदेह साबित होता है.

गलत टायर से जमीन ज्यादा दबती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और पैदावार घट सकती है.

कम या ज्यादा हवा दोनों ही हालत में टायर जल्दी खराब होता है और ट्रैक्टर पर असर पड़ता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

Next: 5, 6 या 7 फीट, आपके लिए कौन सा रोटावेटर है सही?