खेती के हर काम में ट्रैक्टर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है और उसके टायर जल्दी घिस जाते हैं.

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पुराना टायर पूरी तरह खराब नहीं होता और उसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है.

ट्रैक्टर टायर का साइडवॉल अक्सर मजबूत बना रहता है, ऐसे टायर रिमोल्डिंग के लिए उपयुक्त होते हैं.

टायर रिमोल्डिंग एक प्रक्रिया है, जिसमें पुराने घिसे टायर पर नई रबर चढ़ाकर उसे फिर से नया जैसा बना दिया जाता है.

रिमोल्डिंग के दौरान टायर का पुराना ट्रेड हटाया जाता है और मशीनों की मदद से नया डिजाइन बनाया जाता है.

जहां एक नया ट्रैक्टर टायर खरीदने में 35 से 40 हजार रुपये तक खर्च होते हैं, वहीं रिमोल्डिंग का खर्च 15 से 20 हजार रुपये होता है.

अगर टायर फटा हुआ हो या साइड से कमजोर हो गया हो तो उसे रिमोल्ड नहीं कराना चाहिए.

रिमोल्डिंग हमेशा किसी भरोसेमंद और अनुभवी वर्कशॉप से ही करानी चाहिए, ताकि टायर की मजबूती बनी रहे.

पुराने टायर को दोबारा इस्तेमाल करने से कचरा कम होता है और पर्यावरण को होने वाला नुकसान भी घटता है.

खेती की बढ़ती लागत के दौर में टायर रिमोल्डिंग जैसे उपाय किसानों को फायदा पहुंचा सकते हैं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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