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भारत में ज्यादातर ट्रैक्टर टायरों पर 3 से 7 साल तक की वारंटी मिलती है.
वारंटी आमतौर पर मैन्युफैक्चरिंग डेट या खरीद की तारीख से शुरू होती है.
कई कंपनियां प्रोराटा वारंटी देती हैं, यानी टायर जितना कम घिसा होगा, उतना ज्यादा फायदा मिलेगा.
एमआरएफ, जेके, अपोलो, सीएट, गुडईयर जैसी कंपनियां किसानों को लंबी वारंटी का विकल्प देती हैं.
ओवरलोडिंग, गलत हवा दबाव, कट या पंचर की स्थिति में वारंटी मान्य नहीं होती.
टायर को लंबे समय तक धूप में रखने या गलत स्टोरेज से भी वारंटी खत्म हो सकती है.
टायर खरीदते समय बिल और वारंटी कार्ड संभालकर रखना बहुत जरूरी है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.