उत्तरायण की शुरुआत के साथ सूरज की किरणें उत्तर दिशा में बढ़ने लगती हैं और दिन लंबे होते हैं. 

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इस बदलाव का सीधा असर पौधों की वृद्धि, स्वास्थ्य और उनकी प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है. 

अगर आप पौधों की सही देखभाल नहीं करेंगे, तो तेज धूप और बढ़ते तापमान से उनका नुकसान भी हो सकता है.

पौधों को दिन में कम से कम 4-6 घंटे की धूप मिलनी चाहिए. फूलों वाले पौधों के लिए 5-7 घंटे की सीधी धूप रखें.

बढ़ते तापमान के कारण जड़ों की सक्रियता बढ़ जाती है. 3-4 दिन के अंतराल पर गहरी सिंचाई करें.

हर 15–20 दिन में पौधों की टहनियों और सूखी डालियों की छंटाई करें. इससे पौधों की ऊर्जा नई कोपलों में लगती है.

3 मिलीलीटर नीम का तेल और 5 मिलीलीटर गो-मूत्र को 1 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. 

नीम के पत्तों और गो-मूत्र को 1:2 अनुपात में मिलाकर स्प्रे करें. यह तरीका पौधों को कीटों और संक्रमण से बचाता है.

सूर्य की रोशनी से पौधों में नई कोपलें निकलती हैं, पत्तियां हरी-भरी बनती हैं और फूलों की कलियों का विकास तेज होता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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